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युँ न गुजरा करो ऐ सनम

Jitendra SinghJitendra Singh February 27, 2022
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युँ न गुजरा करो ऐ सनम

इस तंग दिल के गलियारे से,

तुम्हारे आने से ये गुलिशतां फिर से खिल उठते है,

जो है अगर अब भी मोहब्बत हमसे,

आकर इज़हार ऐ इश्क़ फिर से कर भी दो,

तड़पाओ ना ऐसे हम मचल उठते हैं,


मेरे ख़्वाबों में तो आना जाना होता ही है,

एक रोज़ आकर मिल भी लो,

वैसे ख़वाइशें तो बेइंतहा है हमारी तुमसे,

पर पहली चाहत है, की गले तो तुम लगा ही लो!!!

~Jeet

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