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Valentines PoetryPoetry1 min read

तेरे दिल की दहलीज़ पे मैं सुबह को शाम करना चाहता हुँ,

Jitendra SinghJitendra Singh February 16, 2022
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तेरे दिल की दहलीज़ पे मैं सुबह को शाम करना चाहता हुँ

अपनी ज़िंदगानी के तमाम क़िस्से तेरे नाम करना चाहता हुँ,

पल भर इजाज़त दे अगर इस चाँद से चेहरे को निहारने की,

आँखों में सजा के इसका नूर उम्र सारी मैं बसर करना चाहता हुँ!!


ये जो तेरी रेशमी ज़ुल्फ़ें जब बिख़र कर गालों पे आती है,

इस दुनिया में हसीन सबसे फिर तु ही नज़र मुझे आती है,

बहकने लगता है दिल जिन अदाओं को देख के तेरी,

अपने सीने में कही उन्हें मैं छुपा लेना चाहता हुँ,

तेरे दिल की दहलीज़ पे मैं सुबह को शाम करना चाहता हुँ,

अपनी ज़िंदगानी के तमाम क़िस्से तेरे नाम करना चाहता हुँ,


~Jeet

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