सुन, तेरी मासूमियत's image
Valentines PoetryPoetry1 min read

सुन, तेरी मासूमियत

Jitendra SinghJitendra Singh February 18, 2022
Share0 Bookmarks 98 Reads2 Likes

सुन, तेरी मासूमियत आज

फ़िर क़ोई कमाल कर गयीं

पायल की झनक

दिल की बस्ती में नया बवाल कर गयीं,

और फिर मुस्कुराना भी ज़रूरी था क्या

तेरा मुझे युँ देख कर,

होश संभालें ही थे

की तेरी खिलखिलाहट फिर बेहाल कर गयीं॥



~Jeet

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts