आज मैं तुमसे फिर कुछ कहने आया हुँ's image
हिन्दी पखवाड़ाPoetry2 min read

आज मैं तुमसे फिर कुछ कहने आया हुँ

Jitendra SinghJitendra Singh December 23, 2021
Share2 Bookmarks 359 Reads3 Likes

सुनो, आज मैं तुमसे फिर कुछ कहने आया हुँ,

अपनी वह मासूमियत भी संग अपने लाया हुँ,

वही भोलापन, जिसे देख हार गयी थी तुम मुझ पर,

वही दीवानापन जिसने बनाया था तुमको बेख़बर,

वही सादगी, वही अन्दाज़,

वही कहानियाँ, वही अल्फ़ाज़,

बेख़बर इस जहां से आज मैं तुमसे मिलने आया हुँ,

तुम सुनो तो सही, आज मैं तुम्हें फिर से पाने आया हुँ,

अपनी वह मासूमियत भी संग अपने लाया हुँ॥

 

धड़कन थम सी जाती सी जाती है,

जब कदम तू दूर जाने को बढ़ाती है,

हर रात सोने को जब आँखे बंद होती है,

नींद बहुत दूर सही पर इनमें शक्ल तेरी ही होती है,

तुझे कैसे बताऊँ मैं, तुझे रिझाने ही तो आया हुँ

रूठ गयी जो तू इस कदर, तुझे फिर से हँसाने आया हुँ,

तुम सुनो तो सही, आज मैं तुम्हें फिर से पाने आया हुँ,

अपनी वह मासूमियत भी संग अपने लाया हुँ॥

 

हर इश्क़ में ये तो होता ही है दिलबर

कुछ मोल अश्कों के चुकाने होते है,

ग़लतियाँ कर बैठते है हम अक्सर

पर युँ इन बातों से ख़फ़ा भी न होते है,

है कहीं नहीं तेरे जैसा चाहने वाला मुझे,

ये सोच कर ही हर लम्हात में मैं मुस्कुराया हुँ

अब जो तू हो रही है ग़ैर, तुझे अपना बनाने आया हुँ,

तुम सुनो तो सही, मैं आज फिर तुम्हें पाने आया हुँ,

अपनी वह मासूमियत भी संग अपने लाया हुँ॥



:-Jeet





No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts