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ऐ ज़माने तेरे जैसा नहीं हूँ थोड़ा सा भी

Jitendra SinghJitendra Singh December 30, 2021
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खुश होके दुखी दिखना नहीं आता

दुखी होके खुश दिखना नहीं आता

ऐ ज़माने तेरे जैसा नहीं हूँ थोड़ा सा भी

अपने रंग छिपाना मुझे नहीं आता!!!

 

मैं जो भी हूँ जैसा भी हूँ सामने हूँ

पीठ पीछे मिज़ाज बदलना नहीं आता

कहने को तो लोग अपने ही है सब यहाँ

पर मन की बात पढ़ना किसी को नहीं आता!!!

 

फ़िक्र होने लगी है अब तो खुदकी मुझे

नित-नये ज़ख्मों को भरना जो नहीं आता

खुले दिल से अपनाता हूँ मैं तो सबको

पर क्यू हर कोई मुझे अपनाना नहीं चाहता!!!

 

कुछ तो कमी रह जाती होगी मेरी तरफ़ से ही

जो हर बार यूँ दिल का टूटना समझ नहीं आता

कोशिशें हज़ार कर बैठा मेरा मन..पर

तुम सबकी तरह हँस कर टाल देना मुझे नहीं आता!!!


Jeet


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