अपूर्ण प्रेम's image
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तुम्हे याद करने को
मैं रोज नए शब्द ढूंढता हूं
हर हर्फ में मैं अपनी
व्याकुलता को सींचता हूं
मैने पिरोया है तुमको सांसों में
आयत सा हररोज तुम्हे पढ़ता हूं
चांद को तुम्हारी तस्वीर बनाकर
मैं हररोज सजदा करता हूं
अधूरे प्रेम को मैं अपने
कलम की स्याही से पूर्ण किया करता हूं।

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