Gareebi ka krandan's image
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गरीबी का क्रंदन


आधे तन कपड़ा लपेटे

आधे मन लज्ज़ा समेटे

प्रश्न है ये कौन है 

जिसने इक उंगली उठा

बेपर्दा तुमको कर दिया ।


दौलते ढेरों कमा कर

हवस खाने की बढ़ा कर

अट्टालिका में बैठ तुमने

रेशमी लिबास पहन

खुद को नंगा कर लिया ।


लैवेंडर में पसीना बदल

मुगालते में भूल कर

निवाला मुंह का छीन कर

गरीबों की हसरतें जला

शरारों से रोशन घर किया ।


टुकड़ों में जी मर रहे

भूख खा रहे दर्द पी रहे

अधनंगे आधे पेट सो

कमज़र्फ़-ए-दुनिया ने यहां

ज़िन्दा लहू दफन किया ।


मधुश्री


मुम्बई महाराष्ट्र


@सर्वाधिकार सुरक्षित

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