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इश्क़ और चाय

Jatin RanaJatin Rana June 16, 2020
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वो अदरक की चाय,

मैं उसमे डूबा बिस्कुट हूँ।

वो घना काला बादल,

मैं उसमें छुपा पानी हूँ।

वो काली घटा का प्यार,

मैं उससे घटती नफ़रत हूँ।। (1)


वो मेरी दीवानी,

मैं उसमें खोया आशिक़ हूँ।

वो गर्म पकोड़े जैसी,

मैं बाहर पडती बारिश हूँ।

वो 5 स्टार का केक,

मैं ढाबे का शेक हूँ।।     (2)


वो गगन में उड़ती पतंग,

मैं उसमे लगी डोर हूँ।

वो होंठो की मुस्कान,

मैं मुस्कान का कारण हूँ।

वो आँख का आँसू,

मैं उससे घटटा सौदा हूँ।

वो गरम चाय की प्याली,

मैं उसमे जलता सुट्टा हूँ।।   (3)


वो हुस्न की रानी,

मैं शब्दों का राजा हूँ।

वो नरम शब्दो की वाणी,

मैं अग्नि उगलता बाजा हूँ।

वो प्यार की प्यासी चिड़िया,

मैं प्यास भुजाता नलका हूँ।।  (4)


वो धक-धक करती धड़कन,

मैं दिल से बहता खून हूँ।

वो चंचल समंदर की मछली,

मैं दरिया सा बहता सुकून हूँ।। (5)


वो अदरक कि चाय,

मैं उसमें डूबा बिस्कुट हूँ।

वो गर्म चाय की प्याली,

मैं उसमें जलता सुट्टा हूँ।।   (6)


~जतिन राणा

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