Awaaz Tumhari nahi...'s image
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ज़िन्दगी झूल रही मौत की गोद मेँ,
आसमान बरस् रहा कैहैर बन्के हवाओं से,
अज़ीज़ो की खैरियत् मांगते दुआएं नहि थकती,
और तुम कैहते हो की मेरे हाथ कुछ् नही।

सांसो कि लङियां जो कुचली जा रही अपनों के आगे,
कायनात् जो बेबस रह गयी अपनी तख्लीक् के बचाने,
मौत जो ज़िन्दगी के सर से गुजर् रही हर लम्हा,
पर तुम कैहते हो मुआमला तुम्हारा नही।

जब आओगे उन्हि दर् ए अत्फालो पे जिनकी मासूमियत् से खेल् गये,
क्या दर्कार् कहोगे अपनी बे हय नज़रो से तुम्,
जिनके चराग् बुझे तुम्हारी नादानियों से,
और तुम कैहते हो कसूर तुम्हारा नही।

कितने भी सद्के कर लो इन् रूह ए शिकस्तां के आगे,
तुम्हारी प्यास् कि आग़ न बुझेगी इन्के ज़हन् से,
बाद मुददत भी भूल जाये ये ऐसे जख्म् नही,
और् तुम कैहते हो ये दुआ तो तुम्हारी नही।

आदम् ने आदम् को बेचा ऐसा भी मन्ज़र देखा,
नज़र् उठा के फिर जशन भी मनाये जनाज़ो में,
सिक्के जो मज्मुआ किये कब्र की ज़मीन् से,
और तुम कैहते हो की ये सौदा तुम्हारा नही।

इसने किया, उसने न किया, हमने कहा, उसने न सुना,
कब तक लाशों के ढेर पे ये तैहरीर् करोगे तुम,
मुददा तो ये हुआ कि कयामत् पे क्या दलील करोगे तुम,
ज़हन से आवाज़ आयी जो चीख् कर इल्ज़ाम देगी,
और् तुम् कैह दोगे कि वो आवाज़ तुम्हारी नही,
और् तुम् कैह दोगे कि ये आवाज़ तुम्हा

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