समाज 
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राम पूछे राम कहां है 
आराम-तलब नाकाम यहां है
काम का न‌ सम्मान यहां है
सबका अपना दाम यहां है
चलता बस नाम यहां है
राम पूछे राम कहां है
दुष्कर्मों के ढेर यहां ,
कर्मो के परिणाम कहां है
अच्छाई का ईनाम यहां ,
लोगों में अब ईमान कहां है
सच्चाई तोड़ती दम यहां ,
सड़कें शमसान जहां है 
राम पूछे राम कहां है ।।

                         - आdarsh ❤️

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