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यमुना नदी : बरहुला घाट

JahajiSandeshJahajiSandesh November 24, 2021
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यमुना नदी : बरहुला घाट

" बरहुला घाट " यमुना नदी का एक नामचीन किनारा जहाँ पर दोनों छोर पर बसे गांव का मिलन एक डोंगी के जरिये रोज़ होता है और वही डोंगी जोड़ती है दोनों गाँव के दिलों को ,रिश्तों को ,सभ्यताओं को और देती है रोज़गार !
कार्तिक महीने में ठंड और हवा का मिलाप इस क़दर रहता है कि यमुना नदी से मौसम भी आँख मिचौली करता है और ऊपर से डोंगी का सफ़र ! बस ये समझ लीजिए कि चलती ट्रेन से कूदने से भी ज़्यादा खतरनाक ! यहाँ की सबसे खूबसूरत बात पता है क्या है ! - यहाँ आज भी वापसी का किराया प्यार और हँसी से ही दे दिया जाता है बिल्कुल किसी चुटकुलों की तरह ! 

हाँथ में खैनी लिए बनवारी ज़ुबान से थोड़ा हकलाते हुए एक लंबी आवाज़ लगाई और सबको जल्दी आने को बोलने लगा ,
सुबह के 8 बज रहे थे मास्टर साहब अपने निर्धारित समय पर थे और बनवारी को भी सही वक्त पर उनको उस पार तक लेकर जाना था , डोंगी और ज़मीन के बीच के फासले को क्षण भर के लिए शून्य करती एक लकड़ी ,जिसे यहाँ की भाषा में पटरा कहा जाता है ,लगाया गया ताकि बिना पानी में प्रवेश किये मोटरसाइकिल और मास्टर साहब दोनों को डोंगी में बिठाकर उस पार पहुंचाया जा सके ।

बनवारी कि सुबह यमुना नदी के बरहुला घाट से शुरू और शाम बरहुला घाट से ही खत्म हुआ करती थी। चप्पू चलाने का काम मास्टर साहब और एक और साथी का रहता था और डोंगी को रास्ता दिखाता था अपना बनवारी !
ये सिलसिला न जाने कबसे चलता चला आ रहा है ।
वक़्त बदल गया ,
लोग बदल गए ,
नहीं बदला तो बरहुला घाट और आर-पार का प्यार 

- गौरव शुक्ला"अतुल"

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