वक्त के साथ रिश्तों की बदलती हकीकत ।'s image
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वक्त के साथ रिश्तों की बदलती हकीकत ।

JAGJIT SINGHJAGJIT SINGH April 16, 2022
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क्यों कभी कोई अपने बारे में नहीं लिखता।

इस दुनिया वालो को हमारे चेहरे की सिर्फ़ हसी दिखाई देती है दर्द क्यों नही दिखता।


मतलब की है ये दुनियां सारी।

इनको कहा किसी की फिक्र होने वाली।


पैसों को लेकर भाई भाई से रूठ जाता है।

 सालों पुराना खून का रिश्ता यहां जमीन जायदाद के लिऐ कुछ पल में टूट जाता है।


अपने मां बाप की कुछ बच्चो को आज कल बिल्कुल नहीं फिक्र।

मां बाप किसके आगे करे अपने दुख का जिक्र।


एक बहन अपनी ही बहन से आज कल दिल से नहीं मिलती।

खुद की बहन की खुशी से क्यों ऐक बहन ही इतनी जलती।

आज कल पैसों से सारी रिश्तेदारी चलती।


जिसके पास है पैसा।

सब उसी से पूछते है हाल तेरा है कैसा।


जिसके पास नहीं होता पैसा।

उनसे भी कभी पूछ लेना चाहिए हाल है उसका कैसा।


चढ़ते सूरज को हर कोई करता है सलाम।

पैसों के लिऐ कई रिश्ते हो जाते नीलाम।


आज कल कुछ बहनें अपने सगे भाई को राखी बांधने से कतराती।

उसे एक नंबर का कामचोर और पागल बताती।

ये देखकर उस भाई की हिम्मत रोज़ टूट जाती ।


बाहर के लोगों को अपना भाई बताती।

उनसे सारे रिश्ते अच्छे से निभाती।


कौन सी मां अपनी बेटी को ऐसे संस्कार सिखाती।कलयुग की ये निशानी क्यों किसी को नज़र नहीं आती।


बात तो ये सच्ची है क्यों ये बात लोगों को बुरी लग जाती।ये तो प्रभु और नीलू दीदी की दी हुई कलम है जो सनी से सच लिखवाती✍️

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