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मिल्खा सिंह (एक मिसाल)

JAGJIT SINGHJAGJIT SINGH June 19, 2022
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पूरा देश पिछले साल आज ही के दिन बहुत रोया था ।

जब हमने महान एथलीट रफ़्तार के जादूगर के नाम से जाने जाते मिल्खा सिंह को खोया था ।


चलो मिल्खा सिंह के बारे में कुछ बताया जाये।

 कह के प्रभु और नीलू दीदी से इनके बारे में लिखवाया जाये।


तबियत इनकी उस वक्त पिछले कई दिनों से चल रही थी खराब।

तब कुछ दिन पहले ही हुआ था इनकी पत्नी का देहांत। दोनों हुऐ थे करोना बीमारी का शिकार।


(गोविंदपुरा) पाकिस्तान में मिल्खा सिंह जी का जन्म होना।

भारत पाकिस्तान के बटवारे के वक्त बड़ी छोटी उम्र में ही अपने मां बाप और भाई बहनों को इन्होंने खोना। 

जिन्हें याद करके अक्सर इन्होंने कई बार रोना।


अपने भाई मलखान के कहने पे मिल्खा सिंह जी ने दिल्ली आना।

फिर भाई के बार बार कहने पे सेना में भर्ती होने के लिये जाना।


3बार कोशिश करने के बाद चौथी बार में मिल्खा सिंह जी को जगह मिली ।

अपनी पहली 80 रेस में से 77में इन्हें जीत मिली।


पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान की तरफ से इन्हें (फ्लाइंग सिख)का नाम मिला था।

मिल्खा सिंह जी कहते थे मुझे मेरी ज़िन्दगी में हुऐ दो हादसों से बहुत दर्द मिला था ।


 पहला मां बाप का इस दुनिया से चले जाना।

और दूसरा रोम ओलंपिक में गोल्ड मेडल ना जीत पाना।


इस दुख को आखरी वक्त तक मिल्खा सिंह भूल ना पाये।वैसे तो मिल्खा सिंह जी ने कई रिकॉर्ड बनाये।


फिर भी लोगों ने खूब दिया इन्हें प्यार।

लेकिन इनकी आखरी इच्छा थी ओलंपिक में भारत के लिऐ दौड़ में लेकर आये कोई गोल्ड मैडल जिससे भारत का पूरी दुनिया में ऊंचा हो नाम।


पहली बार जब इनको पड़ा था विदेश जाना।

सुंदर सुंदर लड़कियों को देख के इनका ध्यान भंग हो जाना।


सारी रात पार्टी में चला था गाना बजाना।

फिर उसका असर इनके खेल में पड़ जाना।


अपने आप से हुऐ थे मिल्खा सिंह जी बड़े नाराज़।

अपने कोच से भी पड़ी थी इन्हें फटकार।


फिर इन्होंने सोच लिया था कितनी भी खूबसूरत लड़की क्यों ना आ जाये।

अपने खेल से मुझे ध्यान नहीं है हटाना है ।

खुद को किया मिल्खा सिंह जी ने फिर से त्यार।

जीत के आये कई गोल्ड मेडल दर्ज़ है इनके नाम कई रिकॉर्ड।


1959 में मिल्खा सिंह को मिला था पदमश्री जैसा बहुत बड़ा सम्मान।

मिल्खा सिंह जैसे खिलाड़ी बार बार नहीं आते।

खिलाड़ी तो बहुत है हमारे देश में लेकिन मिल्खा सिंह जी की तरह रिकॉर्ड हर किसी से नहीं बन पाते।

 ये तो हो ही नहीं सकता था मिल्खा सिंह जी के सम्मान में प्रभु,नीलू दीदी और मेरी मां मिलकर अपने बेटे सनी से ना कुछ लिखवाते✍️

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