इबादत (कविता)'s image
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लिखता जाऊं आपके बारे में कभी ना रुके हाथ मेरे ।

कुछ तो रिश्ता है आपके और बीच मेरे ।

आपके लिये लिखता जाऊं ।

कभी कोई ग़ज़ल आपके लिये बनाऊं कभी कोई कविता आपको सुनाऊं ।


क्यूंकि वो आप ही तो जिसने मुझे ग़ज़ल लिखने के लिये कलम पकड़ाई थी ।

उस कलम से ना जाने मैंने ना जाने कितनी गज़ले और कविताएं आपके लिये लिख कर दिखाई थी ।

कुछ गज़ले और इबादत को लेकर जितनी भी कविताएं लिखी वो आपको बहुत पसंद आई थी ।


वक्त निकाल के आप जब भी किसी ग़ज़ल या कविता को पढ़ते हो ।

कहते हो सनी कलम के साथ आप तो कमाल ही करते हो ।


मैंने कहा ये सब आपकी वजह से ही हो सका ।

आपने जब से छूआ मेरे हाथ को और दिया मेरा साथ सनी तो गज़ले और अब कविताएं लिखने लगा ।


मेरी हर ग़ज़ल हर कविता में आपकी आंखें तो कभी आपकी खुली जुल्फों की बात होती है ।

क्योंकि लड़कियां तो बहुत है इस दुनियां में लेकिन हर कोई आपके जैसी खूबसूरत नहीं होती है ।


जिस तरह आपने मुझे समझा ।

ऐसे तो आज तक किसी ने कभी ना मुझे समझा ।


आपने मेरे अंदर ग़ज़ल और कविता लिखने का ऐसा जोश जगा दिया ।

आपकी इबादत ने ना जाने सनी से क्या क्या लिखा लिया ।

हम तो बस इतना कहेंगे हमनें आपको अपना खुदा मान लिया ।

✍️

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