एक युग का अंत हुआ ।'s image
International Poetry DayPoetry2 min read

एक युग का अंत हुआ ।

JAGJIT SINGHJAGJIT SINGH May 31, 2022
Share0 Bookmarks 9 Reads0 Likes

आज दोपहर को सिद्धू मूसेवाले का अंतिम संस्कार हो गया ।

कलम उठाई कुछ लिखने के लिये और लिखते लिखते दिल पता नहीं कहा खो गया ।


वो पल बड़ा नाज़ुक था ।

जब सिद्धू मूसेवाले का पिता आंखों में आसूं लेकर पगड़ी उतार कर लाखों लोगों के सामने खड़ा था ।


मां की आंखों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे ।

अपने बेटे के साथ बिताये सारे पल मां बाप को याद आ रहे थे ।

हर कोई बार बार सिद्धू के मां बाप को बस हिम्मत दे रहे थे ।


मां ने अपने हाथों से सिद्धू के बालों को बांधा ।

आखरी बार अपने हीरो को देखने के लिये चाहने वालों का सुबह से लग गया तांता ।


जब सिद्धू मूसेवाले के माथे पे सेहरा सजाया ।

देखने वाले हर शक्श की आंखों में आंसू आया ।


अपने मां बाप की हालत देख कर सिद्धू मूसवाला खुदा से सवाल जरूर करेगा।

एक बार तो सिद्धू मूसेवाले पूछेगा बता खुदा अब मेरे मां बाप की देखभाल कौन करेगा ।


मेरी मां अक्सर मुझे गले लगा लेती थी ।

ना जाने दिन में कितनी बार मेरी नज़र उतार देती थी ।


सिद्धू के पिता को सिद्धू के ऊपर फकर बड़ा था ।

आज उस पिता का दर्द कोई नहीं समझ सकता जिसका जवान बेटा हमेशा हमेशा के लिये हुआ उससे जुदा था ।


नया घर महंगी महंगी गाडियां सब कुछ यही रह गया ।

एक उभरता हुआ सितारा हमेशा हमेशा के लिये खो गया।


सनी किसी ने आज किसी ने कल चले जाना है ।

सिद्धू जैसे गाने लिखने चाह के भी किसी से ये काम ना हो पाना है ।


आज तो सब सिद्धू मूसेवाला की बातें कर रहे हैं।

लेकिन कुछ दिनों बाद इस जमाने ने सिद्धू मूसवाले को भूल जाना है ।

क्योंकि किसी को भूल जाना ये ज़माने का दस्तूर बड़ा पुराना है ।


लेकिन सिद्धू मूसेवाले के मां बाप का ज़ख्म कभी नहीं भर पाना है।

प्रभु,नीलू दीदी और मेरी मां ने मिलकर अभी पता नहीं क्या क्या अपने बेटे सनी से लिखवाना है✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts