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एक कविता इबादत के नाम

JAGJIT SINGHJAGJIT SINGH July 26, 2022
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वो कहते है सनी गज़ले तो कई लिख चुके हो तुम मुझे लेकर अब कोई कविता लिख कर दिखाओ ।

चाहते हो तुम मुझे कितना ये बात अपनी कविता के ज़रिए मुझे बताओ ।


शुरवात मैं कविता की करने जा रहा हूं ।

दिल धाम के पढ़ना मैं अपनी इबादत के लिये ग़ज़ल नहीं कविता लिखने जा रहा हूं ।


आंखें आपकी है इतनी गहरी ।

अक्सर इन पर मेरी नज़र हर बार है ठहरी ।


आपकी खुली जुल्फों के बारे में मैं क्या कहूं ।

दिल कहता है मेरा मुझसे बस मैं सामने बिठा लूं आपको और देखता रहूं ।


गाल है आपके इतने गोरे और सुरख लाल ।

खुदा ने फुर्सत निकाल के बनाया है आपको बा कमाल ।


आपके गोरे गालों पे खुदा ने जो काला तिल है बनाया ।

उसी ने आपको लोगों की नज़र लगने से है बचाया ।


होंठ आपके है जैसे कोई खूबसूरत गुलाब ।

पहनते हो आप एक से बढ़कर एक लिबास ।


सावन में बादल देखकर जैसे मोर का मचलना ।

अच्छी तरह से आता है आपको बड़ी अदा के साथ चलना 


संगमरमर जैसा आपने हुसन पाया है ।

इंसान तो क्या आपने तो खुदा को भी अपना दीवाना बनाया है ।


खूबसूरत हो आप इतने आपको देखकर तो आसमान का चांद भी अक्सर शरमाया है ।

आपको बनाने के खुदा ने वो ढांचा ही ये कहकर तोड़ दिया आपके जैसा कोई और चेहरा मुझसे ना बन पाया है ।


कुछ लोगों को होती है मेकअप की जरूरत ।

लेकिन आपके लिये इतना कहूंगा खूबसूरत हो आप इतने और इतनी प्यारी है आपकी सूरत आपको किसी मेकअप की ज़रा सी भी नहीं है जरूरत ।


जब आप कहोगे मैं आपके लिये ग़ज़ल या कविता लिख कर दिखाऊंगा ।

इबादत करने लगा हूं आपकी इतनी ज्यादा मैं आपको अपनी जान से भी ज्यादा चाहूंगा ।


अंत में आपसे इतना पूछना चाहूंगा के क्या आपको ये कविता पसंद आई ।

जी जान लगा दी मैंने अपनी क्या आपके दिल तक ये कविता पहुंच पाई ✍️

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