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देश की बेटियों को नमन

JAGJIT SINGHJAGJIT SINGH September 23, 2022
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देश की बेटियों ने कल कमाल करके दिखाया ।

जब क्रिकेट में भारतीय वूमेन टीम ने इंग्लैंड को 23साल के बाद उसी की ज़मीन पर हराया ।


देश की बेटियों के बारे में जितना भी लिखूं कम है ।

देश की बेटियों ने पूरी दुनियां को बता दिया हम में बहुत दम है ।


हरमनप्रीत कौर ने क्या गज़ब का खेल दिखाया ।

कोई भी गेंदबाज इन्हें आउट ना कर पाया ।

 वही देश की एक और बेटी रेणुका सिंह ने इंग्लैंड की टीम के 4बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया ।


इंग्लैंड टीम को 23साल के बाद उन्हीं की ज़मीन पर हराना बहुत बड़ी बात है ।

ये बात बिलकुल सही है ये खुशी पूरी टीम और हमारे देश वासियों के लिये बेहद ख़ास है ।


आगे भी हर खेल में देश की बेटियों का हमें हौसला बढ़ाना चाहिए ।

जीत हार की परवाह कभी नहीं करनी चाहिए ।


जो टीम अच्छा खलेगी वो जीत जायेगी ।

अगर कोई टीम हार भी गई तो वो अपनी हार से भी बहुत कुछ सीख कर जायेगी ।


हरमनप्रीत कौर ने कई बार अपनी टीम को फाइनल तक 

पहुंचाया ।

लेकिन जब टीम फाइनल मैच ना जीत पाई उस दर्द को कई बार हरमनप्रीत ने अपने दिल में दबाया ।


आज भी हमारे देश में लड़के और लड़कियों में फ़र्क किया जाता है ।

लड़कियों को कई बार बहुत कमज़ोर बताया जाता है ।


लेकिन आज लड़कों से ज्यादा लड़कियां नाम कमा रही है।

अपनी पहचान अपने दम पर और कड़ी मेहनत से बना रही है ।


कुछ लोग कहते है पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया ।

लेकिन साहब जब पूरा देश लड़कियों को खुल कर ज़िन्दगी जीने का मौका देगा तब और ज्यादा बढ़ेगा इंडिया ।


हर बंदिश लड़कियों पे लगाई जाती है ।

लड़की अगर किसी से हंस कर बात कर ले तो उसी वक्त उस लड़की पर उंगली उठाई जाती है ।



मां के पेट में लड़का है या लड़की ये पता करने का काम कई मां बाप आज भी करते है ।

आज भी लड़कियों के पैदा होने पर कई मां बाप क्यों डरते है ।


अगर मां के पेट में होता है बेटा तो पूरा परिवार खुशी मनाने लग जाता ।

लेकिन अगर घर में पहले से एक से ज्यादा बेटी है तो एक मां से पूछे बिना पेट में पल रही बच्ची को इस दुनियां में आने से पहले मरवा दिया जाता ।


ऐसा देश है हमारा जहां औरत की नसबंदी करवाई जाती ।

जब किसी मर्द से नसबंदी करवाने को कहा जाता तो बात मर्दानगी पे कैसे आ जाती?? ।


औरत है बहुत मजबूत लेकिन कुछ मर्द इस देश के बहुत है कमज़ोर ।

अपनी औरतों पे हाथ उठाते उनकी मर्दानगी में बस इतना सा है ज़ोर ।


औरत अपने परिवार अपने बच्चों के लिये सब कुछ सह लेती है ।

औरत अपने दिल का दर्द कई बार दिल में दबा लेती है ।

दर्द में भी वो एक औरत ही है जो सबके सामने मुस्कुरा देती है ।


कलम प्रभु,और नीलू दीदी दी हुई है जो हर रोज़ कुछ ना कुछ नया लिखवा लेती है✍️

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