चाचा जी's image
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जिन्हें गुज़रे हो गये 5साल।

आज की पोस्ट मेरे दलबीर चाचा(रिंपा) जी के नाम।


वैसे तो है मेरे चाचा जी और भी है बड़े।

लेकिन इनकी तरह दोस्ती निभाने वाले ना मुझे मिले।


कुछ खटी कुछ मीठी है इनके साथ मेरी यादें।

बताते है वो सारी बातें।


क्रिकेट खेलना और देखना ये बहुत पसंद करते थे।

नई नई फिल्में देखना भी बहुत पसंद करते थे।

लेकिन अपने बड़े भाई से बहुत डरते थे। 

उनकी इज्ज़त तो भगवान की तरह करते थे।


जो दिल में इनके आया वो ये काम अक्सर करते थे।

वक्त ने ऐसी मारी थी इन्हें मार।

मां बाप के छोटी उम्र में ही चले जाने के बाद बुरी संगत से ना पा सके ये पार।


लेकिन कहते है बुरे इंसान में भी कुछ अच्छा अरूर होता है।

देखने वाले पे बहुत कुछ निर्भर होता है।


हर इंसान जन्म से बुरा नहीं होता है।

कुछ वक्त का भी कसूर होता है।


मेहनत करने से चाचा जी कभी नहीं डरते थे।

कई कई घंटे लगातार काम करते थे।


कुछ लोगों ने इन्हें बदनाम बड़ा किया।

शराबी तक का इन्हें नाम दिया।

हद से ज्यादा इनका इस्तेमाल किया।


कोई भी मां अपने बेटे को शराबी नहीं बनाती।

शराब पीनी तो ये दुनिया उसे सिखाती।


कई बुरी औरतें पूरे परिवार में फूट डलवाती।

भाई को भाई से अक्सर लड़वाती।


सच लिखवाते रहना प्रभु आप और नीलू दीदी आप अपने बेटे सनी से मुझे इस बात से बिल्कुल परवाह नहीं गालियां कितनो की मुझे लेकर निकाली जाती।

लोगों की और कुछ रिश्तेदारों की ज़ुबान पकड़ी नहीं जाती।

चाचा जी आपकी और मां आपकी याद आज भी अक्सर हमें रुलाती।

कलम प्रभु और नीलू दीदी की है इसलिए रोज़ कुछ नया लिखवाती✍️

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