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फातिमा शेख को क्या दर्जा मिलना चाहिए??? || आर्टिकल || एम ए हबीब इस्लामपुरी

एम ए हबीब इस्लामपुरीएम ए हबीब इस्लामपुरी March 10, 2022
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भारत का पहला कन्या स्कूल खोलने में सावित्रीबाई फुले की की मदद करने वाली एक मुसलमान थीं। जिनका नाम  फ़ातिमा शेख़ है। फ़ातिमा शेख़ भारत की पहली कन्या स्कूल की पहली मुस्लिम अध्यापिका थीं। जिन्होंने मुस्लिम लड़कियों के तालिम के बारे में सबसे पहले सोचा। उनके प्रयास ने ही मुस्लिम लड़कियों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने की कोशिश की, जिसकी बानगी आज भी कहीं ना कहीं दिखती है। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए ज़मीनी स्तर पर प्रयास किए और उन्हें उनका हक दिलाया। फातिमा शेख़ सावित्री बाई फुले के मिशन की सबसे मजबूत सहयोगी और शिक्षिका थीं। फातिमा शेख़ ने तकरीबन 175 साल पहले समाज के सबसे दबे कुचले लोगों और ख़ास कर स्त्रियों की तालीम के लिए सावित्री बाई फुले के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम किया। फुले के पिता ने जब दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे उनके कामों की वजह से उनके परिवार को घर से निकाल दिया था, तो फ़ातिमा शेख़ और उस्मान शेख़ ने सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिबा फुले को उस मुश्किल समय में बेहद अहम सहयोग दिया। उनके इस कार्यों की वजह से समाज में विरोध हो रहा था। ऐसे मुश्किल घड़ी में विरोध के बावज़ूद भी फ़ातिमा शेख़ के बड़े भाई उस्मान शेख़ ने उन्हें रहने और स्कूल खोलने के लिए मकान दिया दिया था। एक जनवरी सन् 1848 को पुणे के बुधवार पेठ में जब पहला स्कूल खोला गया तो सावित्री बाई के साथ फातिमा शेख़ भी वहां पढ़ाती थीं। क्योंकि उस ज़माने में अध्यापक मिलने मुश्किल थे इसलिए फ़ातिमा शेख़ ने ही सावित्रीबाई के स्कूल में पढ़ाने की ज़िम्मेदारी भी संभाली। दलितों वंचितों स्त्रियों को तालीम दिलवाने के लिए सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख़ को काफी बाधाए झेलनी पड़ी और अपने कार्य के लिए उन्हें एक साथ हिंदुओं और मुसलमानों के विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन सावित्री बाई और फातिमा शेख लोगों के विरोध के सामने नहीं झुकी। सावित्री बाई फुले के साथ फातिमा शेख समाज का रोजाना पत्थर, गोबर और कीचड़ सहती थी। उन्होंने विरोध के बावजूद स्त्रियों की शिक्षा पर ज़ोर दिया और इस साझेदारी ने विरोधियों का सामना एक साथ किया। सावित्री बाई को फतिमा पर भरोसा था। उनकी गैर हजरी में वह स्कूल संभालती थीं। तो अगर सावित्री बाई पहली महिला शिक्षिका हैं और उन्हें क्रांति ज्योति कहा जाता है, तो फातिमा शेख को क्या दर्जा मिलना चाहिए???

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