ढक रहे हों बादल चांद को || शायरी || एम ए हबीब इस्लामपुरी || Arman islampuri's image
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ढक रहे हों बादल चांद को || शायरी || एम ए हबीब इस्लामपुरी || Arman islampuri

एम ए हबीब इस्लामपुरीएम ए हबीब इस्लामपुरी March 12, 2022
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ढक रहे हों बादल चांद को
लगता है इस तरह,
देख कर तेरी गालों पे
गिरती हुई जुल्फों को। 



✍ एम ए हबीब इस्लामपुरी

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