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गुज़ारिश 

गुज़ारिश है बस तुमसे की तुम हम से इतने भी खफा ना हों 
कि हम बारिश के खुयाइश मे बिल्कुल सूखे न पड़ जाए
कि हम वो पत झड़ के मौसम में वो आखरी पत्ता ना बन जाए 
कि हम अमावास कि रात में वो अंधेरा ना बन जाए

बस गुज़ारिश है तुमसे एक बार मिलने की 
और हमारे चांद का नूर देखने की
जिसकी खुशबू मेरे रोम रोम मे बसी हुई है ,जेसे फूल गुलाब का 

बस गुज़ारिश है तुमसे अधूरी कहानी को पूरा करने की 
जेसे चकोर अधूरा हैं बिन चांद का
जेसे मोर अधूरा हैं बिन बारिश का
वैसे मैं अधूरी हूं तेरे बिन यारा 

बस गुज़ारिश हैं उस आसाम वाले से की तू मुझे भी उस लोक भेज दे 
जहाँ दिया संग बाती बन सके
जहाँ बाग और माली बन सके
जहाँ इत्र और खुशबू बन सके
जहाँ‌ मेरा प्यार और मैं एक बन सके ।
~ Ishika Gupta

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