शंखनाद's image
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उठो शंखनाद करो चलो के ईश्वर सोया है
अन के दो कण जुटाने निकला था जिसके लिए, उसने भुजाओं में दम तोड़ा है...
ना धूप से रूका ना वर्षा की बौछारौ से
ना ज्वार से ना धूल की हुंकारो से
फिर क्यों निर्जीव मेरा भविष्य पड़ा है
क्यों त्रासदी ने मुझको घेरा है...
उठो शंखनाद करो चलो के ईश्वर सोया है |
अब हुंकारा गुंजे गा, हर लहर उफान उठायेगी
ना हाथ उठेगा दुआ के लिए ना कोई मूर्त पूजी जायेगी
ईश्वर भी सजिव हो, जाने उसने भी कुछ खोया है
उठो शंखनाद करो चलो के ईश्वर सोया है |

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