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सांसें है जितनी....

Indraj YogiIndraj Yogi April 7, 2022
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दर्द दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है,

मुझे आश है तेरे आगोश की,

बात यह है कि मैं कराह नही सकता,

दुखती है कि रग खामोश सी,


मैं लिखूं तुझे चिट्ठी,

मुझे दरख़्त की चिंता खा जाती है,

मुझे रात की वीरानियां खा जाती है,

मेरे चेहरे पर उदासियां छा जाती है,


इलाज ईजाद न कोई,

आंखे महीनो भर से न सोई,

तू मेरी कौन है, कितनी,

क्या जिंदगी में सांसे है जितनी....

        ~इन्द्राज योगी


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