प्रेम की अनुभूति...'s image
Kavishala SocialPoetry1 min read

प्रेम की अनुभूति...

Indraj YogiIndraj Yogi October 4, 2021
Share0 Bookmarks 87 Reads0 Likes

प्रेम की अनुभूति,

निश्छल मन में होती है,

छल से मनुष्य,

भौतिक रूप से ही,

प्रसन्न रह सकता है,


रोक-टोक,दमन,हत्या,समझौता,

ये वे ही भौतिक तत्व है,

जो जीवात्मा को,

परमात्मा से,

मिलने को रोकते है,


और इसके साथ ही,

इनका साथ निभाता,

हमारा समाज,

हर बार कोशिश करता है,

प्रेम के दूतों का संदेश,

गंतव्य स्थान,

पर पहुंचने से,

पहले रोक देनी की।


~इन्द्राज योगी

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts