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कोयले का ब्लैक-आउट...

Indraj YogiIndraj Yogi October 8, 2021
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कोयले की भारी अनुपलब्धता,

कॉलोनियों में छाया ब्लैक आउट,

हर आदमी पर काला साया,

सब को लगे एक-दूसरे पर डाउट,


कोयले की चिंता सताई,

अब कैसे करेंगे भट्टी मक्का सिकाई,

धोबी को चिंता सताई,

इस्तरी बिन कैसे कमाई,


कंपनियों की बकौती,

उस पर बिजली की कटौती,

राजनेताओं का कयास,

विपक्ष खा गया हमारा प्रयास,


हुई घोषित,

कही अघोषित,

घोषणा,

नही बिजली,

शक्ले नही दिखाई देती,

अब तो उजली-उजली,


कैसे निकले यह कंटक,

बरपाया है बिजली संकट,

मुन्ना छटपटाए देख पंखा,

कौन ले अब उसकी कविता से पंगा,

ऊपर पंखा चलता है,

नीचे बेबी सोता है,

अह्ह्ह्ह! कोयले की दलाली से यह हाल,

ना पंखा चलता है,

ना बेबी सोता है,

सिर्फ अंधेरे को देख रोता है,


बिजली कटौती है संभावित,

आसमां ताप है निर्धारित,

झुलसाएगी ये गर्मी,

और बिजली बिल बेदर्दी,


है पावर कंपनियों की वाह-वाह,

और है आमजन स्वाहा:

इनकी तरफ से तो है अर्ज,

हम लेंगे तुमसे हर प्रकार के खर्च ....


~इन्द्राज योगी

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