कविता's image
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कल्पनाओं को अपरिमित,

अनुभूतियों में संझो कर,

तुम्हारी अनुकृति बनाना ही,

तो है कविता,


तेरे सुखद अहसास को,

स्वर में गुनगुना कर,

शब्द-शब्द कर देना ही,

तो है कविता,


मेरे मन में बैठी,

दिए धरना,

धारणा तेरी,

का वर्णन ही,

तो है कविता,


हृदय का तेरा स्पंदन,

तन का मेरा कंपन,

बचा जीवन दोनो का असंपन्न,

की कथा ही,

तो है कविता....


~इन्द्राज योगी


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