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हजार दाखिल है.....

Indraj YogiIndraj Yogi February 21, 2022
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दर्द एक मुनासिब नहीं,
मिरी किस्मत में,
है हजार दाखिल,
दर्द इस दिल में,

एक नजर नहीं उठती,
एक आंसू भर नही थमता,
एक याद कुछ यूं बसर करती है।
कि हर आह पर दिल दरकता है।

एक मैं नहीं होश-ओं-हवास में,
एक दिल है उसकी बंदिश में,
एक सांसे नही टूटती, 
एक इश्क नहीं छूटता...
"इन्द्राज योगी"






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