अनमने मन से...'s image
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ऊंघते अनमने से मन से,

झुंझला, खिन्नता से भरे मन से,

देखा है आज मैंने,

क्षणिक उठा नभभर दृष्टि,

उजले-काले, छटतें बनते,

बिना पग के पयोध चलते,




ठीक! ऐसे ही मेरे मन में पलते,

दुख के काले, सुख के उजले,

भावना के अनुरूप बादल बदले,

मन में बरसे, आंखों में ढलते,

निराशाएं जब आशाओं पर हावी होती,

इच्छाएं मेरी सर्जना खोती....

         ~इन्द्राज योगी

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