बेबसी's image
Share1 Bookmarks 24 Reads0 Likes

लम्हों में रुख़ बदलते देखा है,

खामोशी से खुद को टूटते देखा है।


समझ लें कुछ बातें वो अनकही,

खुली आँखों से मैंने सपने बिखरते देखा है।


यूँ तो सहारे की आदत न थी,

पर एक सहारे के लिए खुद को बेसहारा होते देखा है।


कोशिश तो किया बार बार समझाने का,

पर हर कोशिश को ज़ार ज़ार होते देखा है।


ख्वाइशें बढ़ती ही जा रही थी,

पर ख्वाइशों का पर भी कटते देखा है।


यूँ तो मुस्कुराते हुए दिखता हूँ,

पर मुस्कुराहट में भी खुद का दर्द देखा है।


लोग कहते है उम्मीद पर दुनिया कायम है,

पर उम्मीद को खुद की दुनिया उजाड़ते देखा है।


अजीब सा दस्तूर है वक़्त का,

जो सबसे पास था, उसी को आज दूर जाते देखा है। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts