कही हुई बात's image
Share0 Bookmarks 39 Reads1 Likes

सब कह रहे थे

मुंसिफ़ चोर है

मैंने भी कहा

मुंसिफ़ चोर है


सब कह रहे थे

हमें चाहिए आज़ादी

मैंने सुना और कह दिया

मुझे चाहिए आज़ादी


सब कह रहे थे

मुझे रोज़गार दो

मैंने भी कह दिया

मुझे रोज़गार दो


सब किसी न किसी के

कहे को दोहरा रहे थे


भीड़ से किसी एक ने कहा

शाम हो गई

चलो अपने घर चलते हैं

किसी ने नहीं कहा

कल फिर आएंगे।


- साहिल मिश्रा


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts