नारी पर आक्षेप's image
Share0 Bookmarks 22 Reads0 Likes

नारी के नारीत्व पर आक्षेप करना बहुत सरल है

मगर बात एक सच कहती हूँ जो कि घातक एक गरल है

है यह बात कोई नयी नहीं कि नारी को अबला बना के प्रस्तुत किया पुरुषों नें

रख कर दांव पर सम्मान नारी का

द्यूत किया पुरुषों नें

छाती पीट कर छाती ढकते

जब द्रुपद पुत्री चिल्लाई थी

तब भी मर्दों तनिक भी लज्जा तुमको तो नहीं आयी थी

 तुमने ही तो अम्बपाली को नगरवधु बनाया था

तब उसने भी अपनी काली नियति को अपनाया था

छुप कर के जब छद्मवेश में देवराज जी आये थीं

हुई कलंकिनी अहिल्या केवल

इंद्र देव थें तब भी और देव ही कहलाये थें

गयी थी जानकी आर्य के पीछे वन में साथ निभाने को

अग्नि परीक्षा दी उसने अपना सतीत्व दिखलाने को

इतने पर भी क्या चाहते हो

नारी अबला ही बनी रहे?

सहती रहे अपमान मूक हो

मुख से कुछ भी नहीं कहे?

मत ललकारो नारी के धैर्य और ममता को

धैर्य का बांध जो टूट गया

तो सह न सकोगे क्षमता को 

शोषण के विरुद्ध अगर नारी मन में ठानेगी

रक्त से फिर दुराचारी के केश धो के ही मानेगी


- हृषीता 'दिवाकर'

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts