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एक दिन। एक दिन ये सब ख़त्म हो जाएगा। सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। अंधेरा, उजाला, सुख, दुःख, लगाव, नफ़रत, शोहरत, नाम, दोस्ती, दुश्मनी, तुम जो पाना चाहते हो, उसकी दौड़, तुमने जो पा लिया है, उसका संतोष, तुम जो नहीं पा सके, उसका अफ़सोस, सब ख़त्म हो जाएगा। यही बस एक मात्र सच है। कि एक दिन वो सब ख़त्म हो जाएगा जो तुम्हें लगा था कि कभी ख़त्म नही होगा। और अंत के आख़री क्षणो में जब तुम ज़िंदगी को सच के दर्पण में देखोगे, तो तुम्हें, इनमे से कुछ भी याद नहीं आएगा। तुम्हें याद आएँगी, बस कुछ आँखे, गर्म, भीगी हुई, जो तुमसे कुछ कह रही थी, पर तुमने सुना ही नहीं। तुम्हें याद आएँगी कुछ आवाज़ें, जो तुमने सुनी और अनसुनी कर दी। तुम्हें याद आएंगे कुछ चेहरे, जिनको तुमने ज़िंदगी की होड़ में पीछे छोड़ दिया। तुम्हें याद आएँगी वो बातें, जो की जा सकती थी, पर तुमने की ही नहीं। तुम्हें याद आएगी वो कहानियाँ, जो तुमने अधूरी छोड़ दी। तुम्हें याद आएगा वो आख़री आँसू, जो तुम्हारे प्रेमी ने तुम्हें रोकते वक़्त बहाया होगा। तुम्हें याद आएगा वो आख़िर आलिंगन जो तुमने किया ही नहीं। तुम्हें याद आएगा वो हाथ, जो तुम्हें दुनिया से बचाना चाहता था, और तुमने उसे थामा ही नहीं। तुम्हें याद आएगा वो प्रेम, जो मृत्यु के बाद भी तुम्हारी आत्मा को जीवित रखता, जो तुम्हें शून्य से सनातन कर देता, पर तुमने उसे नहीं चुना। तुमने चुना, प्रेम से दूर रहना, तुमने चुना नाशवंत और क्षणिक सुख। तुमने चुना भागना, दौड़ना, पाना, खोना, और मिट्टी हो जाना। मैं, ऐसे नही मरना चाहती। और इसीलिए मैं बातें चुनती हूँ, मैं कहानियाँ चुनती हूँ, मैं गिरना और गिरकर उठना चुनती हूँ। मैं साथ चलना चुनती हूँ। मैं, प्रेम को चुनती हूँ। ताकि जब मैं मरूँ, मैं मिट्टी नहीं, घर हो सकूँ…!!


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