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फागुन रंग बहार

Himkar ShyamHimkar Shyam March 17, 2022
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हँस कर कोयल ने कहा, आया रे! मधुमास।

दिशा-दिशा में छा गया, फागुन का उल्लास।।


झूमे सरसों खेत में, बौराए हैं आम।

दहके फूल पलास के, हुई सिंदूरी शाम।।


टूटी कड़ियाँ फिर जुड़ीं, जुड़े दिलों के तार।

प्रेम-रंग में रँग गया, होली का त्योहार।।


होली के हुड़दंग में, निकले मस्त मलंग।

किसको यारो होश है, पीकर ठर्रा-भंग।।


दिन फागुन के आ गए, सूना गोकुल धाम।

मन राधा का पूछता, कब आयेंगे श्याम।।


होरी-चैती गुम हुई, गुम फगुआ की तान।

धीरे-धीरे मिट रही, होली की पहचान।। 


भूखे बच्चे के लिए, क्या होली, क्या रंग?

फीके रंग गुलाल हैं, जीवन है बदरंग।।


दुख जीवन से दूर हो, ख़ुशियाँ मिले अपार।

नूतन नई उमंग हो, फागुन रंग बहार।।


‘हिमकर’ इस संसार में, सबकी अपनी पीर।

एक रंग में सब रँगे, राजा, रंक, फकीर।।


■ हिमकर श्याम

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