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इश्क़ की पनाहों में

Himkar ShyamHimkar Shyam February 14, 2022
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सफ़र का लुत्फ़ मिले ज़िंदगी की राहों में
चलूँ जो साथ तेरे इश्क़ की पनाहों में

महक उठी हैं फ़जाएँ किसी के आने से
बहार बन के समाया है कौन चाहों में

असर कुछ ऐसा हुआ उनके शोख़ जल्वों का
उन्हीं का अक्स बसा जाता है निगाहों में

गिला रहा न कोई अब हयात से हमको
सिमट के आ गईं ख़ुशियाँ तमाम बाँहों में 

किसी ने याद किया आज मुझको शिद्दत से
खड़ीं हैं साथ मेरे हिचकियाँ गवाहों में

कभी तो हाल सुनो पास आके 'हिमकर' के
बदल न जाए सदा उसकी सर्द आहों में 

-हिमकर श्याम

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