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बंसीधर धनश्याम

Himkar ShyamHimkar Shyam August 30, 2021
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रूप सलोना श्याम का, मनमोहन चितचोर।

कहतीं ब्रज की गोपियाँ, नटखट माखन चोर।।


निरख रही माँ जसुमति, झूमा गोकुल धाम। 

मीरा के मन में बसे, बंसीधर घनश्याम।। 


सुध-बुध खोई राधिका, सुन मुरली की तान।

अर्जुन की आँखें खुली, पाकर गीता ज्ञान।।


झूठे माया-मोह सब, सच्चा है हरिनाम।

राग-द्वेष को त्याग कर, रहें सदा निष्काम।।    


पाप निवारण के लिए, लिया मनुज अवतार

लीलाधारी कृष्ण की, महिमा अपरम्पार।।


~ हिमकर श्याम

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