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कविता के रूप में ग़ज़ल का प्रयास---
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तेरी  बेवफ़ाई  भी  क्या  रंग  लाई,
ख़बर  ये  लगी  तू   हुई  है  पराई। 

जिसे देखने को जतन सब किये थे,
उसी ने नज़र आज  हम  से  चुराई। 

किसी  वक़्त थे  तुम  हमारे  सहारे, 
ये शोहरत तुम्हारी हमीं से तो आई। 

कमी कुछ तेरी आशिकी में नहीं थी,
हुआ बस यही, रास हमको न आई। 

वो क़समें, वो वादे, वफ़ा  के  इरादे,
कि इन सब पे भारी  तेरी  बेवफ़ाई। 

हेमलता पालीवाल उदयपुर राजस्थान।

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