घर वापस's image
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 कतारों में खड़ा कर के
उनका मज़हब पूछने वालों
अल्लाह की किताबों में भी
उस्तादों की इबादत होती है।।।। 

वो मर कर उन वादियों में बस गए है अब
बर्फीली सर्दियों में धूप की तरह जगमगाएंगे
लाख रोक लो बढ़ते क़दमों को तुम
अमर शहीद उन वादियों को महफ़ूज़ बनायेंगे।।।। 

डर गोलियों के शोर से नहीं लगता उनको अब
दिलों की धड़कन में खामोशियों की तरह बस जायेंगे
जो गोलियों से कत्ले आम कर रहे हो तुम
कश्मीरी एक दिन अपने घर वापस ज़रूर जाएँगे।।।। 

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