Tum ho's image
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तुम हो,बस तुम हो।
इन बारिशों की नमी में हो तुम,
सब पूरा होने के बावजूद उस छूटी कमी में हो तुम,
मेरे कल और आज में तुम हो,
मेरे हर काज में तुम हो,
इस शोर में खामोशी हो तुम,
मेरी मदहोशी हो तुम।
मेरी और उन सितारों के दूरियों में तुम हो,
मेरे अनकही मजबूरियों में तुम हो,
मेरी बेवजह हसने की वजह तुम हो,
उसके कारण फसने की वजह भी तुम हो,
तुम्हारे बिना बेवजह सी थी मैं,
मेरे होने की वजह अब तुम हो,
तुम हो, बस तुम हो।
      ~ हर्षिता कीर्ति

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