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अब तो नींद भी आती है अच्छी, एक अरसे के बाद

मुझे आज भीम भरोसा है मोहब्बत पर, कितने जख्मों के बाद


तुझे अंदाजा ही नहीं था, मेरी मोहब्बत की शिद्दत का

बोला था लौट कर आऊंगा, भले जन्मों के बाद। 


आँखो को आज भी इन्तजार है, तेरी एक झलक का

 हमने कुछ हसीन देखा ही नहीं, तेरी जुल्फों के बाद। 


सियासत आमादा है, तुम आपस में झगड़ते रहो

 वक्त का तकादा है, तुम एक हो इतने बरसों के बाद। 


जो सुकून मिला करता था, कभी तेरे गले से लगकर वर्धन 

उस सुकून का आज भी मुंतजिर हू, इतने जलसों के बाद। 



                          ~ हर्षवर्धन तिवारी


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