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तेरे हिज्र में बिताया एक भी पल गवारा ना हुआ
मलाल भी नहीं कि वो हमारा ना हुआ। 

किसी और केेे साए से रूबरू होकर लौटे हैं
क्या इसमें नुकसान तुम्हारा ना हुआ। 

दुनिया से बेखबर सा रहने लगा हूं
क्या ये एहसान तुम्हारा ना हुआ। 

                 
~ हर्षवर्धन तिवारी

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