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यह बारिश एक पहेली है (कविता )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' October 10, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
यह बारिश एक पहेली है
(कविता)

यह बारिश एक पहेली है 
बेमौसम आ करके जग में 
यह जज्बातों से खेली है 
यह बारिश एक पहेली है ।।

सब उम्मीदों को तोड़ दिया 
अन्नदाता  झकझोर दिया ,
रिमझिम बरसी यों धरती पर
मानो नार नवेली है ।
यह बारिश एक पहेली है ।।

फसल पकी बादल बौराए,
भर भर घन मेघों के आए
फसलों को कर तहस-नहस 
सबके प्राणों से खेली है ,
यह बारिश एक पहेली है ।।

अतिरेक  सदाँ पागलपन है ,
सारी दुनियाँ ने माना है   
बेमौसम सब बेमानी है 
यह जाने सभी जमाना है,
बेमौसम बारिश का पानी 
सबके ऊपर हठखेली है।।

यह बारिश एक पहेली है 
बेमौसम आकर के जग में
 यह जज्बातों से खेली है,
यह बारिश एक पहेली है ।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

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