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वो आज भी करीब है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' July 24, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता
वो आज भी करीब है
( कविता)

वो शाम भी अजीब थी
 ये शाम भी अजीब है।

 वह कल भी पास पास थी
 वह आज भी करीब है ।।

हरिशंकर सिंह सारांश  

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