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"स्वर्ग मेरा फिर से आबाद हो रहा है "(कविता) हाले कश्मीर

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 2, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"स्वर्ग मेरा फिर से आबाद हो रहा है " (कविता) हाले कश्मीर 

चैन है, अमन है, 
 गुरबत भी जा रही है
हर ओर वादियों में फुर्सत सी आ रही है ।

वो मुफलिसी का आलम, वो दौर जा रहा है ,
उजड़े हुए चमन में,
 फिर बौर आ रहा है।

 उम्मीद है अमन में ,
फिर खलल ना पड़ेगा,
यह स्वर्ग मेरा फिर से आबाद हो सकेगा।

 ना होंगी गम की रातें,
ना तम का आलम होगा, नापाक ताकतों का अब दौर जा रहा है।

 भटके हुए चमन में फिर बौर आ रहा है।।

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