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श्री राम को प्यार मिला शबरी के झूठे बेरों में

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 4, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
श्री राम को प्यार मिला शबरी के झूठे बेरों में 
(कविता)

कंदमूल खाने वालों से
मांसाहारी डरते थे ।।
पोरस जैसे शूरवीर को
नमन सिकंदर करते थे ।। 

चौदह वर्षों तक खूँखारी
वन में जिनका धाम था ।
मन मंदिर में बसने वाला
 शाकाहारी राम था।

चाहते तो कर सकते थे
 आराम एश बसेरों में ।
लेकिन उनको प्यार मिला
शबरी के झूठे बेरों में ।।

हरि शंकर सिंह सारांश  


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