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"सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना" (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' January 29, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना "( कविता)

कभी तुमको मेरी जरूरत पड़े तो ,
सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना ।।

अंधेरों में मैं, घिर गया आज तो क्या?
 जमाने ने मुझको सताया है तो क्या?
 इशारों से अपने ,तू संदेश देना ,
सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना।।

 सदा ही तेरी ओर देखा है मैंने ,
शराफत भरी उस अनोखी नजर से ,
अंधेरों में भी उस नजर का नजारा ,
मेरे हमसफ़र तू मुझे भेज देना ।
सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना

कभी तुम खिले थे गुलाबों के जैसे ,
अब लग रहे हो जमाने के जैसे ,
उजालों में कोई मुझे छांव देना ।
सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना।।

 आंखों से तेरी पिया जाम मैंने ,
सदा ही सराहा ,तेरा काम मैंने ।
तू जीवन की नैया को पतवार देना ।
सितमगर मुझे सिर्फ आवाज देना।।

 हरिशंकर सिंह सारांश

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