"सफलता का सार "
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"सफलता का सार" (कविता) 

समय की रेत पर
 कदम बढ़ा
न विलंब कर
 संघर्ष कर ,संघर्ष कर ।

त्याग कर आलस को अपने कर्म कर ,
 संघर्ष कर ,संघर्ष कर।

आंँधियों से पार पाने की तमन्ना पाल ले, 
 पथ तेरा  संघर्ष का यह जान ले  ।

काज जितने भी पडे अविलंब कर
 संघर्ष कर, संघर्ष कर।।

राह में कुछ मुश्किलें भी आएंँगी
कुछ बड़ी, कुछ छोटी, परेशानियांँ बन जाएंगी
सामना कर, मृदुल बन दूर सब हो जाएंँगी।

 राह में कांटे बिछे जो,
 दूर अपने आप कर,

 संघर्ष कर ,संघर्ष कर ।।

त्याग कर आलस को अपने कर्म कर

संघर्ष कर, संघर्ष कर ।।  

हरिशंकर सिंह सारांश 

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