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संघर्ष ही तो जिंदगी का सार है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 3, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता
संघर्ष ही तो जिंदगी का सार है  (कविता)

पुष्प की इच्छा यही
 मैैं बादलों से जा मिलूूँ ।
 जिंदगी की चाह में
मैं स्वर्ग में खिलता रहूँँ।।

 कल्पना के लोक में
 यह पुष्प  विचरण कर रहा।
 अपनी ही गागर  सोच की
 वह लालसा से भर रहा।।

 तिल तिल गुजरता वक्त भी
 उसको दिखाई ना दिया।
 आसान उसकी जिंदगी
संघर्ष ना जिसने किया।।

 संघर्ष ही तो जिंदगी का सार है।
 संघर्ष के बल पर खड़ा संसार है।।

 सोचता हूंँ मैं कभी
 क्या जिंदगी में कर सका।
 अपने ही अभिनव ज्ञान का
संचार ढंग से कर सका।।

 आवाज मन से आ रही
 तू ज्ञान का दीपक जला। 
ज्ञान सबकी जिंदगी
 संँसार को इतना बता।।

 अभिलंब पल यह ज्ञान का
मैैं साथ अपने ले चलूंँ।
  पुष्प की इच्छा यही
 मैैं बादलों से जा मिलूूँ।।

 गर कभी भटकाव हो
 तो ज्ञान अपना साथ हो।
 जिंदगी की सुबह में
 हरगिज न काली रात हो।।

 खिलता हुआ मेरा चमन
 संतृप्त हो, उल्लास हो।
 हर पल की सबकी जिंदगी
 हर तौर पर खुशहाल हो।।

 ऐसा दिवस ना हो कभी
जब मन तेरा मलीन हो।
 हर तरफ तेरे उजाला
 ना कभी गमगीन हो।।

 मैं आदमी को आदमी के
ज्ञान से पहचान लूंँ
 पुष्प की इच्छा यही
 मैैं बादलों से जा मिलूूँ।।
जिंदगी की चाह में ,
मैं स्वर्ग में खिलता रहूंँ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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