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"सच्चाई की डगर को हरगिज न त्यागना"कविता

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 28, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"सच्चाई की डगर को हरगिज ना त्यागना"
(कविता) छात्र विशेषांक  

मैं गीत गा रहा हूंँ,
 मैं गीत गा रहा हूंँ।

 येे अनमोल बातें
 सबको बता रहा हूंँ,
 मैं गीत गा रहा हूंँ।।

 ये वक्त कीमती है
 इसको न बिसारना,
 सच्चाई की डगर को
हरगिज न त्यागना ।

साथ लेकर सबको
 चलने की जिद करो,
 जो राह जिंदगी की
उस पर अमल करो।

 ये अनुभव की बातेें
 सबको बता रहा हूंँ।
 मैं गीत गा रहा हूंँ।
 मैं गीत गा रहा हूँ ।

वो जिंदगी के सपने
 तुमने कभी जो देखे,
 गर वक्त ना रहा तो
रह जाएंगे अधूरे,

 हाथ में उठा के कलम
 सिंहनाद कर दो,
 खाली जो गगरी ज्ञान की
 उसको समझ से भर दो।।
 
पहले कही येे बातें
फिर से बता रहा हूंँ,
 मैं गीत गा रहा हूंँ
 मैं गीत गा रहा हूंँ।।

 गर आज तुम पढ़ोगे
तो कल को जी सकोगे, 
जीवन का दर्दे जहर भी
तुम हंँस के पी सकोगे ।।

जागो कलम उठाओ
 अब वक्त आ रहा है ,
वह साथ में तुम्हारा
 प्रतिफल भी ला रहा है।।

 यह छात्र हित की बातेें
तुमको बता रहा हूंँ,
 मैं गीत गा रहा हूंँ
मैं गीत गा रहा हूँ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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