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"रोशनी तुझसे चले मन में तेरे विश्वास हो"(कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 12, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"रोशनी तुझसे चले मन में तेरे विश्वास हो "
"कविता " मानव विशेषांक 

रोशनी तुझसे चले
मन में तेरे विश्वास हो।
 
आंँधियों से पार पाने की
 तमन्ना ,मन में भरा जज्बात हो
 जो दिखाए पथ पथिक को
तुुम ही संबल बनो ।

राह का पत्थर न बनकर
मील का पत्थर बनो ।

शुद्ध तेरा आचरण हो
ज्ञान अपना पास हो।
 तू अडिग पथ पर चले
हरगिज़ नहीं संताप हो ।।

रोशनी तुझसे चले
 मन में भरा विश्वास हो।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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