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रंग बदलती जिंदगी (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' June 19, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता
 रंग बदलती जिंदगी
(कविता)

सफर में धूप बहुत है
तप सको तो चलो,
भीड़ तो बहुत होगी
नई राह बना सको तो चलो।।

माना कि मंजिल दूर है
एक कदम बड़ा सको तो चलो
मुश्किल होगा सफर
भरोसा खुद पर हो तो चलो।।

हर पल हर दिन
रंग बदलती जिंदगी 
कोई नया रंग
 बना सको तो चलो।

राह में साथ मिले ना मिले
अकेला चल सको तो चलो,
जिंदगी के कुछ मीठे लम्हे
 बुुन सको तो चलो ।।

दूसरों को बदलने की
 चाहत छोड़कर 
खुद को बदल सको तो चलो ।।

हरिशंकर सिंह सारांश        

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